Rbc

Blood cells |RBC,WBC,Platlets,Blood Group|रक्त कणिकाएं,लाल रक्त,श्वेत रक्त

Blood (रक्त/रूधिर)

4 रक्त एक तरल संयोजी उत्तक है इसकी मानव शरीर में मात्रा शरीर के वजन लगभग 7-9% (56 लीटर) होती है। तथा इसका pH मान 7.36 होता है।  रक्त में दो प्रकार के पदार्थ पाए जाते हैं
(I) प्लाज्मा (Plasma)
(II)रक्त कणिकाए (Blood Corpuscles)
यह रक्त का अजीवित तरल भाग होता है। रक्त का लगभग 60% भाग प्लाज्मा होता है। प्लाज्मा = 90% water, 7% प्रोटीन्स, 0.9% लवण (Salt), 0.1% ग्लूकोज + शेष पदार्थ।
Note –
(i) प्लाज्मा का कार्य पचे हुए भोजन एवं हार्मोन का शरीर में संवहन करना होता है।
(ii) Serum – जब प्लाज्मा में से प्रोटीन्स (Proteins) को हटा दिया जाए तो शेष बचे हुए
प्लाज्मा को Serum को कहा जाता है।

रक्त कणिकाएं (Blood Corpuscles)
(i) RBC Red Blood Corpuscles (लाल रक्त कणिकाएं)
(ii) WBC CWhite Blood Corpuscles श्वेत रक्त कणिकाएं)
(iii) Platlets (रक्त बिम्बाणु )

RBC (Red Blood Corpuscles)

 

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के स्तनधारियों की लाल रक्त कणिकाएं उभयावंतल (BiConcave) आकार के होते हैं तथा इनमें केंद्रक नहीं होते हैं केंद्रक ना होने का कारण हीमोग्लोबिन के लिए पर्याप्त जगह बनाना है।

Note-ऊँट एवं लामा नामक स्तनधारी की RBC में केंद्रक पाया जाता है।
लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण अस्थि मज्जा (Bone marrow) में होता है। तथा इसके लिए आयरन, विटामिन B12 (cynocobalamine) एवं फोलिक एसिड , RBC के निर्माण में सहायक होते हैं।

Note – भ्रूण अवस्था में इसका निर्माण यकृत एवं प्लीहा में होता है।
RBC का जीवनकाल 120 दिन तक होता है ।Laboratory and blood bank में 60 दिन तक होता है।)
कर्क इनका लाल रंग हीमोग्लोबिन की उपस्थिति के कारण होता है। लाल रक्त कणिकाओं की मृत्यु यकृत में होती है इसलिए यकृत को RBC की कब्र कहा जाता है।

हीमोग्लोबिन

 

hemoglobin

RBC में हीमोग्लोबिन होता है जिसमें हीम नामक रंजक होता है जिसके कारण रक्त लाल होता है ग्लोबिन एक लौह युक्त प्रोटीन है जो ऑक्सीजन एवं कार्बन डाइऑक्साइड से संयोग करने की क्षमता रखती है। हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने पर रक्त हीनता / एनीमिया (Anaemia ) रोग हो जाता है। औसत RBC की संख्या 5-5.5 million /mm(100 ml Blood) होती है। लाल रक्त कणिकाओं की संख्या मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की अपेक्षा पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के रक्त में ज्यादा होती है।
लाल रक्त कणिकाओं की संख्या को हीमोसाइटोमीटर (Haemocytometer) से ज्ञात किया जाता है। Haemoglobin: Male 145-165 gm/100 ml of blood Female 12.5-145 gm/100 ml of blood

WBC (white bl00d Corpuscles)

 

Wbc

श्वेत रक्त कणिकाएं अमीबा के आकार की होती हैं अर्थात् इनका कोई निश्चित आकार नहीं होता है। WBC में केंद्रक उपस्थित रहता है।
इनका निर्माण अरिथमज्जा एवं लिम्फनोड्स में होता है एवं इनका जीवनकाल 3-10 दिन तक हो सकता है इनका मुख्य कार्य शरीर को रोगों के संक्रमण से बचाना है इसलिए इन्हें शरीर का सिपाही भी कहा जाता है।

WBC को प्रतिरक्षा तंत्र का हिस्सा माना जाता है एवं उनकी औसत संख्या 8000 से लेकर 12000/mm(100ml) होती है।
श्वेत रक्त कणिकाओं में वृद्धि श्वेताणु वृद्धि (Leucoevlotis ) एवं उनकी संख्या का कम होना श्वेताहास (Leucopenia) कहलाती है।
4 शरीर की वह स्थिति जिसमें श्वेत रक्त कणिकाओं का बनना कम अथवा बंद हो जाता है उस स्थिति को ल्यूकिमिया (Blood cancer) कहते हैं।

श्वेत रक्त कणिकाएं पांच प्रकार की होती हैं।

(i) Eosinophi
(ii) Basophil
(iii) Neutrophil (60-70%)(Maximum part of WBC)
(iv) Monocyte
(V) Lymphocyete
The Expansing Neutrophils कणिकाएं रोगाणुओं तथा जीवाणुओं का भक्षण करती हैं एवं घाव को भरने में सहायता करती हैं। RBC और WBC का अनुपात 6001 होता है।

Platlets / Thromoboytes (रक्त बिम्बा)

इनका जीवन काल 79 दिन तक होता है। के केन्द्रक अनुपस्थित होता है। के औसत संख्या 1-1.5 लाख/mmहोती है।
इसका मुख्य कार्य रक्त का थक्का बनने में मदद करना है। डेंगू ज्वर क के कारण रक्त बिम्बाणुओं की संख्या कम हो जाती है।
रक्त के कार्य (Functions of Blood ) ऊतकों अथवा अंगों को आक्सीजन पहुंचाना। पोषक तत्वों (ग्लूकोजअमीनो अम्लवसा, प्रोटीनलिपिड आदि) को अंगों तक पहुंचाना। के उत्सर्जी पदा(यूरिया, कार्बन डाइऑक्साइड ) को शरीर से बाहर निकालना।शरीर का बीमारियों से रक्षण करना।

रक्त का थक्का बनना (Blood Clotting)
(i) थाम्बोप्लास्टिन + प्रोट्रोम्बिन योम्बिन
(ii) औोम्बिन + फाइब्रोनोजन फाइब्रिन
(iii) फाइब्रिन + बिम्बाणु – रक्त का थक्का
रक्त प्रोट्रोम्बिन तथा फाइब्रोनोजन का निर्माण विटामिन k की सहायता से यकृत में होता है। हेपरिन (Hepturin-Protein रक्त का थक्का बनने से रोकता है जिसका निर्माण यकृत में होता है

 [su_heading size=”17″ margin=”10″]Blood Group (रक्त समूह)[/su_heading]
रक्त समूह की खोज कार्ल लैंडस्टीनर (Carl Landsteiner) ने की थी ।
मनुष्य के रक्तों की भिन्नता का मुख्य कारण लाल रक्त कणिकाओं पर पाई जाने वाली ग्लाइको
प्रोटीन है जिसे हम एंटीजन या प्रतिजन (Antigen) कहते हैं जो दो प्रकार के होते हैं।
(i) एंटीजन A
(ii) एंटीजन B
इनकी उपस्थिति के आधार पर मनुष्य में 4 प्रकार के रक्त समूह होते है।

AB, O,A and B both  ) Both antibody absent , Both Antigen absent , AB ] रक्त आधान (Blood Transfusion )
एंटीजन  एवं एंटीबॉडी A तथा एंटीजन एवं एंटीबॉडी Bएक साथ नहीं रह सकते हैं ऐसा होने पर यह आपस में मिलकर अत्यधिक चिपचिपे हो जाते हैं जिससे हमारे शरीर के अंदर रक्त का थक्का बन जाता है जिसके कारण व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। शरीर के अंदर रक्त के थक्के बनाने को अभिष्लेषण Embolism कहते
 [su_heading size=”17″ margin=”10″] रक्त समूह O[/su_heading]

 


रक्त समूह O को सर्वदाता कहते हैं क्योंकि इसमें कोई एंटीजन नहीं होता है, एवं रक्त समूह AB को सर्वग्रहता कहते हैं क्योंकि इसमें कोई एंटीबॉडी नहीं होती है। Rh फैक्टर की खोज : लैण्डस्टीनर और वीनर (Landsteiner and Weiner) ने रुधिर

या रक्त में एक अन्य प्रकार के एंटीजन का पता लगाया जिस Rh एंटीजन कहते हैं क्योंकि इस तत्व का पता इन्होंने Rhesus (Rh) Monkey में लगाया।

 [su_heading size=”17″ margin=”10″]Rh रक्त समूह[/su_heading]
जिन व्यक्तियों के रक्त में यह तत्व पाया जाता है उन्हें। Rh ‘ कहा जाता है एवं जिन व्यक्तियों
के रक्त में यह तत्व नहीं पाया है। उन्हें Rh कहते है।माता पिता का रक्त समूह संभावित असंभावित ]


Erwhroblastosis Foetalis: >यदि पिता का रक्त समूह RhVE एवं माता का रक्त समूह Rh हो तो जन्म लेने वाले शिशु की जन्म से पहले गर्भावस्था में अथवा जन्म के तुरंत बाद मृत्यु हो जाती है ऐसा दूसरी संतान के जन्म होने पर होता है क्योंकि इस स्थिति में
पहली संतान के समय माता के शरीर में Rh एंटीबॉडी बन जाती हैं।

 

Haemophilia (अनुवांशिक रोग) – रक्त को थक्का बनने में सामान्य समय 15 सेकंड ( अधिकतम 1-2 मिनिटका समय लगता है लेकिन इस बीमारी में रक्त का थक्का बनने मे 15 मिनट या इससे ज्यादा समय लगता है के ये बीमारी एंटी हीमोफिलिक तत्व की कमी के कारण होती है।

 

Biology Notes in Hindi PDF 

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