Biology

Branches Of Biology | जीव विज्ञान की शाखाएँ

Branches of Biology | जीव विज्ञान की शाखाएँ

Biology (जीव विज्ञान)
(1)Zoology (प्राणी विज्ञान)
(2) Botany वनस्पति विज्ञान)

Bios Life (जीवन)
logy(logus)=Study (अध्ययन) के Biology : यह विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतगर्त जीवधारियों का अध्ययन किया जाता है। जीव विज्ञान शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम मार्क एवं गिवेरिनस (1801) ने किया था।
* जीव विज्ञान एवं प्राणीविज्ञान का जनक अरस्तू को कहा जाता है क्योंकि उन्होंने ही सर्वप्रथम पौधों एवं जन्तुओं के जीवन के विभिन्न पक्षों के विषय में अपने विचार प्रकट किए थे।

वनस्पति विज्ञान का जनक थियोफ्रेस्टस को कहा जाता है।

Branches Of Biology | जीव विज्ञान की शाखाएँ

जीव विज्ञान की शाखाएँ(Branches Of Biology)

1. Apiculture – Honey bee -Apis mellifera मधुमक्खी पालन के अध्ययन को Apiculture कहा जाता है।
2. Sericulture – रेषम कीट पालन को Sericulture कहा जाता है।
3. Pisciculture – मत्यस्य अध्ययन को Pisciculture कहा जाता है।
4. Mycology – कवकों के अध्ययन को Mycology कहा जाता है।
5. Phycology – शैवालों के अध्ययन को Phycology कहा जाता है।
6. Pomology – फलों का अध्ययन।
7. Ornithology – पक्षियों का अध्ययन।
Note – Salim Ali को भारत में पक्षियों के जनक (father of Ornithology) के नाम से
जाना जाता है।
8. Ichthyology– मछलियों का अध्ययन
9. Entomology – कीटों का अध्ययन
10. Ophiology – सर्षों का (snakes) अध्ययन
11. Anatomy – जन्तुओं के विभिन्न अंगों की आंतरिक रचना का अध्ययन किया जाता है।
12. Cytology – कोषिका तथा इसके अंगों की संरचना का अध्ययन इस शाखा के अंतर्गत किया जाता है।

   Part-B

13. Ecology – पर्यावरण का पादपों एवं जन्तुओं पर और उनका पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है यह अध्ययन Ecology (पारिस्थितिकी) कहलाता है।
14. Embryology – इसके अंतर्गत पादपों एवं जन्तुओं में भ्रूण विकास से संबंधित अंगों, उनकी
रचना और कार्य का अध्ययन किया जाता है।
15. Genetics(आनुवांषिकी) – के सिद्धान्तों एवं पौधों एवं जन्तुओं की उत्पत्ति संबंधित अध्ययन
को आनुवांषिकी कहा जाता है।

16. Paleontology (जीवाष्म विज्ञान)– इसमें पादपों एवं जन्तुओं के जीवाष्मों का अध्ययन किया जाता है।
17. Taxonomy (वर्गीकरण ) – ने इसके अंतर्गत विभिन्न पादपों एवं जन्तुओं की पहचान, उनका
नामांकरण करना और फिर उनकी विषिष्टता के आधार पर उन्हें उचित वर्ग में शामिल करना
सम्मिलित है।
18. Histology (औतिकी) – इसके अंतर्गत पादपों एवं जंतुओं के विभिन्न प्रकार के ऊतकोंका
अध्ययन किया (ऊतक विज्ञान) जाता है।

   Part-C   

19.Endocrinology(अंतः स्त्राविकी) – यह प्राणी विज्ञान की वह शाखा है जिसमें हार्मोन्स (Hormones) के स्त्रवण, प्रकृति (Natureऔर प्रभाव आदि के बारे में अध्ययन किया जाता है।
20.Parasitology(परजीवी विज्ञान) – के प्राणी विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत परजीवियों
के संरचनाओं तथा जीवन क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।

21.Ethology – इसके अंतर्गत प्राणियों के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। विशेषकर प्राकू
तिक परिस्थितियों में प्राणियों का नैसर्गिक या सहज व्यवहार।
22.Herpetology – यह प्राणी विज्ञान की वह शाखा जिसमें Reptiles या सरीसृपों तथा उभयचरों (Amphibian) की संरचनास्वभाव और वर्गीकरण आदि का अध्ययन किया जाता
23.Limnologys – नदी, सरोवर आदि स्थिर मीठे पानी में पाए जाने वाले प्राणियों के अध्ययन से संबंधित को सरोविज्ञान कहा जाता है।
24.Bacteriology (जीवाणु विज्ञान) – यह सूक्ष्म विज्ञान की वह शाखा जिसमें जीवाणुओं की संरचनाउनके प्रकार वर्गीकरणकार्यविधि तथा उनका अन्य जीवों पर प्रभाव आदि विषयों का अध्ययन किया जाता है।

 Part-D

25.Virology(विषाणु विज्ञान) – यह सूक्ष्म विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत विषाणुओं के बारे में अध्यन किया जाता है।
26. Agronomy(शस्य विज्ञान) – खेतों में उगाई जाने वाली फसलों की अपनी विशेष आवश्यकताएं होती हैं, कौन सी फसल के लिए किस प्रकार की मिट्टीपानी तापमान, उर्वरक आदि चाहिए ताकि पैदावार अच्छी हो
27.Nematology – Nematodes कुछ गोल, पतलेबेलनाकार (Cylindrical) या धागे जैसे कृमियों का एक वर्ग है जिसमें से कुछ सदस्य मिट्टी या पानी में परजीवी होते , इस कारण फसलों में कई प्रकार के रोग उत्पन्न करते , इनका अध्ययन Nematology के अंतर्गत किया जाता है।
28. Hydrology(जल विज्ञान) – विज्ञान की शाखा के अंतर्गत भूमि जल के बारे में अध्ययन किया जाता है कि वह फसलों के लिए उपयोगी है
29.Microbiology(सूक्ष्म जीव विज्ञान) – ने इस शाखा के अंतर्गत उन सूक्ष्म जीवों का अध्ययन किया जाता है जिन्हें सिर्फ माइक्रोस्कोप से देखा जा सकता है।  

   Part-E

   

30.Horticulture(उदयान विज्ञान) – ने इसमें उद्यानों से संबंधति अध्ययन किया जाता है।
31.Pedology/Edaphology(मृदा विज्ञान) – मिट्टी के बारे में अध्ययन इस विज्ञान की शाखा के अंतर्गत किया जाता है, 
Note – मृदा के बनने की प्रक्रिया को Pedogenesis कहते हैं।
32.Silviculture(वन वृक्ष विज्ञान) – वनों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले अथवा लगाए जाने वाले वृक्षों के बारे में विस्तृत अध्ययन इसके अंतर्गत किया जाता है।
33.Floriculture (पुष्प विज्ञान) फूलों वाले पौधे तथा उनकी मिट्टीपानी, खाद  के बारे में अध्यन किया जाता है।
34.Laryngology (vocal cord) – स्वर रज्ज के बारे में अध्यन किया जाता है।
35.Psychiatry – इसके अंतर्गत मस्तिष्क संबंधी विकारों का अध्ययन किया जाता है।
36.Taxidermatology – अंतर्गत चर्मइनके रोग, संरचना और उपयोग के बारे में अध्ययन किया जाता है।
37.veterinary science (पषु चिकित्सा विज्ञान)

Classification of animals | जीवधारियों का वर्गीकरण Gk

Classification of animals |जीवधारियों का वर्गीकरण Gk

सर्वप्रथम अरस्तु द्वारा समस्त जीवों को दो समूहों में विभाजित किया गया
1. Animalia (जंतु समूह)
2. Plentae(वनस्पति या पादप समूह)

इसके बाद Carollous Linneaus ने अपनी पुस्तक Systema Naturae में संपूर्ण जीवधारियों को दो जगतों में विभक्त किया
(i) Plantae kingdom (पादप जगत)
(ii) Animalia Kingdom(जंतु जगत)

जीवधारियों का वर्गीकरण

Classification of animals

Note : Carolus Linneaus को आधुनिक वर्गीकरण का जनक भी कहा जाता है। जीव धारियों का 5 जगत में वर्गीकरण परम्परागत बिजगत वर्गीकरण का स्थान अन्ततः whittaker द्वारा 1969 में 5 जगत प्रणाली ने ले लिया।
(i) Monera इस जगत में सभी Procaryotic जीव अर्थात् जीवाणु आदि सम्मिलित किए जाते हैं।
(ii) Protista Sइस जगत में एक कोशिकीय, जलीय एवं eukaryotic जीव सम्मिलित किए जाते हैं। इस जगत के जीव तीन प्रकार के हो सकते हैं।

(a) स्वपोषित (Autotropic) 

(b) परजीवी -इस समूह के जीव अपने आहार के लिए दूसरे जीवों पर (Parasitic) आश्रित रहते हैं।

(c) मृतजीवी (Saprophytic)– यह जीव अधिकतर अपना आहार मृत जीवों से ग्रहणकरते हैं।

(ii) Fungi (कवक) – इस जगत में यूकैयोटिक एवं परपोषित जीव सम्मिलित किए जाते हैं। जिनमें अवशोषण द्वारा पोषण होता है।

(iv) Plantae (पादप जगत) इस जगत में सभी बहुकोषकीय प्रकाश संश्लेषी पादप सम्मिलित
किए जाते हैं।

(V) Animalia Kingdom (जंतु जगत) – जीव सम्मिलित किए जाते हैं। उदाहरण : जेलीफिश, सरीसृपसितारा मछली ।

 

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Rbc

Blood cells |RBC,WBC,Platlets,Blood Group|रक्त कणिकाएं,लाल रक्त,श्वेत रक्त

Blood (रक्त/रूधिर)

4 रक्त एक तरल संयोजी उत्तक है इसकी मानव शरीर में मात्रा शरीर के वजन लगभग 7-9% (56 लीटर) होती है। तथा इसका pH मान 7.36 होता है।  रक्त में दो प्रकार के पदार्थ पाए जाते हैं
(I) प्लाज्मा (Plasma)
(II)रक्त कणिकाए (Blood Corpuscles)
यह रक्त का अजीवित तरल भाग होता है। रक्त का लगभग 60% भाग प्लाज्मा होता है। प्लाज्मा = 90% water, 7% प्रोटीन्स, 0.9% लवण (Salt), 0.1% ग्लूकोज + शेष पदार्थ।
Note –
(i) प्लाज्मा का कार्य पचे हुए भोजन एवं हार्मोन का शरीर में संवहन करना होता है।
(ii) Serum – जब प्लाज्मा में से प्रोटीन्स (Proteins) को हटा दिया जाए तो शेष बचे हुए
प्लाज्मा को Serum को कहा जाता है।

रक्त कणिकाएं (Blood Corpuscles)
(i) RBC Red Blood Corpuscles (लाल रक्त कणिकाएं)
(ii) WBC CWhite Blood Corpuscles श्वेत रक्त कणिकाएं)
(iii) Platlets (रक्त बिम्बाणु )

RBC (Red Blood Corpuscles)

 

Rbc

के स्तनधारियों की लाल रक्त कणिकाएं उभयावंतल (BiConcave) आकार के होते हैं तथा इनमें केंद्रक नहीं होते हैं केंद्रक ना होने का कारण हीमोग्लोबिन के लिए पर्याप्त जगह बनाना है।

Note-ऊँट एवं लामा नामक स्तनधारी की RBC में केंद्रक पाया जाता है।
लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण अस्थि मज्जा (Bone marrow) में होता है। तथा इसके लिए आयरन, विटामिन B12 (cynocobalamine) एवं फोलिक एसिड , RBC के निर्माण में सहायक होते हैं।

Note – भ्रूण अवस्था में इसका निर्माण यकृत एवं प्लीहा में होता है।
RBC का जीवनकाल 120 दिन तक होता है ।Laboratory and blood bank में 60 दिन तक होता है।)
कर्क इनका लाल रंग हीमोग्लोबिन की उपस्थिति के कारण होता है। लाल रक्त कणिकाओं की मृत्यु यकृत में होती है इसलिए यकृत को RBC की कब्र कहा जाता है।

हीमोग्लोबिन

 

hemoglobin

RBC में हीमोग्लोबिन होता है जिसमें हीम नामक रंजक होता है जिसके कारण रक्त लाल होता है ग्लोबिन एक लौह युक्त प्रोटीन है जो ऑक्सीजन एवं कार्बन डाइऑक्साइड से संयोग करने की क्षमता रखती है। हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने पर रक्त हीनता / एनीमिया (Anaemia ) रोग हो जाता है। औसत RBC की संख्या 5-5.5 million /mm(100 ml Blood) होती है। लाल रक्त कणिकाओं की संख्या मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की अपेक्षा पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के रक्त में ज्यादा होती है।
लाल रक्त कणिकाओं की संख्या को हीमोसाइटोमीटर (Haemocytometer) से ज्ञात किया जाता है। Haemoglobin: Male 145-165 gm/100 ml of blood Female 12.5-145 gm/100 ml of blood

WBC (white bl00d Corpuscles)

 

Wbc

श्वेत रक्त कणिकाएं अमीबा के आकार की होती हैं अर्थात् इनका कोई निश्चित आकार नहीं होता है। WBC में केंद्रक उपस्थित रहता है।
इनका निर्माण अरिथमज्जा एवं लिम्फनोड्स में होता है एवं इनका जीवनकाल 3-10 दिन तक हो सकता है इनका मुख्य कार्य शरीर को रोगों के संक्रमण से बचाना है इसलिए इन्हें शरीर का सिपाही भी कहा जाता है।

WBC को प्रतिरक्षा तंत्र का हिस्सा माना जाता है एवं उनकी औसत संख्या 8000 से लेकर 12000/mm(100ml) होती है।
श्वेत रक्त कणिकाओं में वृद्धि श्वेताणु वृद्धि (Leucoevlotis ) एवं उनकी संख्या का कम होना श्वेताहास (Leucopenia) कहलाती है।
4 शरीर की वह स्थिति जिसमें श्वेत रक्त कणिकाओं का बनना कम अथवा बंद हो जाता है उस स्थिति को ल्यूकिमिया (Blood cancer) कहते हैं।

श्वेत रक्त कणिकाएं पांच प्रकार की होती हैं।

(i) Eosinophi
(ii) Basophil
(iii) Neutrophil (60-70%)(Maximum part of WBC)
(iv) Monocyte
(V) Lymphocyete
The Expansing Neutrophils कणिकाएं रोगाणुओं तथा जीवाणुओं का भक्षण करती हैं एवं घाव को भरने में सहायता करती हैं। RBC और WBC का अनुपात 6001 होता है।

Platlets / Thromoboytes (रक्त बिम्बा)

इनका जीवन काल 79 दिन तक होता है। के केन्द्रक अनुपस्थित होता है। के औसत संख्या 1-1.5 लाख/mmहोती है।
इसका मुख्य कार्य रक्त का थक्का बनने में मदद करना है। डेंगू ज्वर क के कारण रक्त बिम्बाणुओं की संख्या कम हो जाती है।
रक्त के कार्य (Functions of Blood ) ऊतकों अथवा अंगों को आक्सीजन पहुंचाना। पोषक तत्वों (ग्लूकोजअमीनो अम्लवसा, प्रोटीनलिपिड आदि) को अंगों तक पहुंचाना। के उत्सर्जी पदा(यूरिया, कार्बन डाइऑक्साइड ) को शरीर से बाहर निकालना।शरीर का बीमारियों से रक्षण करना।

रक्त का थक्का बनना (Blood Clotting)
(i) थाम्बोप्लास्टिन + प्रोट्रोम्बिन योम्बिन
(ii) औोम्बिन + फाइब्रोनोजन फाइब्रिन
(iii) फाइब्रिन + बिम्बाणु – रक्त का थक्का
रक्त प्रोट्रोम्बिन तथा फाइब्रोनोजन का निर्माण विटामिन k की सहायता से यकृत में होता है। हेपरिन (Hepturin-Protein रक्त का थक्का बनने से रोकता है जिसका निर्माण यकृत में होता है

Blood Group (रक्त समूह)

रक्त समूह की खोज कार्ल लैंडस्टीनर (Carl Landsteiner) ने की थी ।
मनुष्य के रक्तों की भिन्नता का मुख्य कारण लाल रक्त कणिकाओं पर पाई जाने वाली ग्लाइको
प्रोटीन है जिसे हम एंटीजन या प्रतिजन (Antigen) कहते हैं जो दो प्रकार के होते हैं।
(i) एंटीजन A
(ii) एंटीजन B
इनकी उपस्थिति के आधार पर मनुष्य में 4 प्रकार के रक्त समूह होते है।

AB, O,A and B both  ) Both antibody absent , Both Antigen absent , AB ] रक्त आधान (Blood Transfusion )
एंटीजन  एवं एंटीबॉडी A तथा एंटीजन एवं एंटीबॉडी Bएक साथ नहीं रह सकते हैं ऐसा होने पर यह आपस में मिलकर अत्यधिक चिपचिपे हो जाते हैं जिससे हमारे शरीर के अंदर रक्त का थक्का बन जाता है जिसके कारण व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। शरीर के अंदर रक्त के थक्के बनाने को अभिष्लेषण Embolism कहते
 रक्त समूह O

 


रक्त समूह O को सर्वदाता कहते हैं क्योंकि इसमें कोई एंटीजन नहीं होता है, एवं रक्त समूह AB को सर्वग्रहता कहते हैं क्योंकि इसमें कोई एंटीबॉडी नहीं होती है। Rh फैक्टर की खोज : लैण्डस्टीनर और वीनर (Landsteiner and Weiner) ने रुधिर

या रक्त में एक अन्य प्रकार के एंटीजन का पता लगाया जिस Rh एंटीजन कहते हैं क्योंकि इस तत्व का पता इन्होंने Rhesus (Rh) Monkey में लगाया।

Rh रक्त समूह

जिन व्यक्तियों के रक्त में यह तत्व पाया जाता है उन्हें। Rh ‘ कहा जाता है एवं जिन व्यक्तियों
के रक्त में यह तत्व नहीं पाया है। उन्हें Rh कहते है।माता पिता का रक्त समूह संभावित असंभावित ]


Erwhroblastosis Foetalis: >यदि पिता का रक्त समूह RhVE एवं माता का रक्त समूह Rh हो तो जन्म लेने वाले शिशु की जन्म से पहले गर्भावस्था में अथवा जन्म के तुरंत बाद मृत्यु हो जाती है ऐसा दूसरी संतान के जन्म होने पर होता है क्योंकि इस स्थिति में
पहली संतान के समय माता के शरीर में Rh एंटीबॉडी बन जाती हैं।

 

Haemophilia (अनुवांशिक रोग) – रक्त को थक्का बनने में सामान्य समय 15 सेकंड ( अधिकतम 1-2 मिनिटका समय लगता है लेकिन इस बीमारी में रक्त का थक्का बनने मे 15 मिनट या इससे ज्यादा समय लगता है के ये बीमारी एंटी हीमोफिलिक तत्व की कमी के कारण होती है।

 

Biology Notes in Hindi PDF 

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Biology PDF Notes For Competitive Exams in Hindi
hello,everyone
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Important Biology Notes
1.Cell कोशिका
2.Tissue ऊतक
3.Muscle and skeletal system मांसपेशी एवं कंकाल तंत्र
4.Nervous system तंत्रिका तंत्र
5.Human eye मानव नेत्र
6.Human brain मानव मस्तिष्क
7.Endocrine system अंतःस्रावी तंत्र
8.Body’s endocrine gland शरीर की अंत: स्रावी ग्रंथि
9.lymphatic system लसीका तंत्र 
10.Communication system संचार तंत्र
11.Function of human heart मानव हृदय का कार्य
12.Reproduction system प्रजनन तंत्र
13.Reproduction of plants पौधों का  प्रजनन
14.small intestine छोटी आंत
15.Gall bladder पित्ताशय
16.Vitamins विटामिन
17.Emission system उत्सर्जन तंत्र
18.Microorganisms सूक्ष्मजीव
19.SOME IMPORTANT TABLES
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Important Biology notes in Hindi PDF भी आप Download कर सकते हो उसकी link भी में आपको नीचे दे दूंगा
SubjectBiology
LanguageHindi
pages32
FormatPDF
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